Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Updated Full
मूल रूप से ये सूत्र प्राकृत, संस्कृत या गुजराती भाषा में हैं। इनका हिंदी अनुवाद समझने के लिए उपलब्ध है, लेकिन पारंपरिक विधि में इन्हीं मूल भाषाओं में बोलने का अधिक महत्व है।
इस लेख में, हम पालीताना की यात्रा के दौरान किए जाने वाले पाँच चैत्यवंदनों की विस्तृत जानकारी, उनके स्थानों का महत्व और हिंदी में विधि प्रस्तुत करेंगे।
5. मुख्य आदिनाथ भगवान चैत्यवंदन (Fifth Chaityavandan of Lord Adinath) palitana 5 chaityavandan in hindi full
नीचे इन पाँच चैत्यवंदनों का संपूर्ण विवरण और उनकी स्तुति की प्रारंभिक पंक्तियाँ दी गई हैं:
रायण पगलिया के सम्मुख तीन खमासमण देकर चैत्यवंदन मुद्रा में बैठें और इस स्तुति का गान करें। प्रगट नाम पुंडरीक जास
भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर पुंडरीक स्वामी इस पर्वत पर करोड़ों मुनियों के साथ मोक्ष पधारे थे। उन्हीं के नाम पर इस पर्वत को 'पुंडरीक गिरि' भी कहा जाता है।
"अदीश्वर जिनरायनो, गणधर गुणवंत; प्रगट नाम पुंडरीक जास, महिमाए महंत।" साथे अणसण ईहां कीध
चौथा चैत्यवंदन पुंडरीक स्वामी (आदिनाथ के प्रमुख गणधर) के सम्मान में किया जाता है। यह उनके तप और अनुशासन को नमन है। प्रार्थना: "आदिश्वर जिनरायनो, गणधर गुणवंत; प्रगट नाम पुंडरीक जास, महिमाए महंत। पांच क्रोड मुणींद, साथे अणसण ईहां कीध; शुक्ल ध्यान..."।
4. चतुर्थ चैत्यवंदन: श्री सिद्धाचल (The Holy Hill - Siddhachal)